मानसिक रोगों और व्यसन का संयुक्त इलाज

Jagruti Rehab Center
Written By
Dr. Amar Shinde
Published on: 23 Jul 2025 | Last Updated on: 27 Jan 2026
मानसिक रोगों और व्यसन का संयुक्त इलाज (dual diagnosis) 01

मानसिक स्वास्थ्य और नशा अक्सर साथ-साथ चलते हैं। कई बार अवसाद, चिंता या तनाव से जूझ रहा व्यक्ति अस्थायी राहत पाने के लिए शराब या ड्रग्स लेने लगता है। धीरे-धीरे यह आदत व्यसन में बदल जाती है और मानसिक रोग को और गहरा बना देती है। इसे ही ड्यूल डायग्नोसिस (dual diagnosis) कहा जाता है, जिसमें मरीज को मानसिक रोग और नशे की समस्या एक साथ झेलनी पड़ती है।

दुनिया और भारत दोनों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। शोध बताते हैं कि सामान्य आबादी में लगभग 5% लोग ड्यूल डायग्नोसिस से प्रभावित होते हैं, जबकि मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों में यह संख्या बढ़कर 25% से भी अधिक हो जाती है। भारत में नशा करने वालों में से 32% लोगों में मानसिक रोग भी मौजूद पाए गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि केवल नशा छुड़ाने या केवल मानसिक रोग का इलाज करना पर्याप्त नहीं है। सही परिणाम पाने के लिए दोनों का संयुक्त इलाज जरूरी है।

मानसिक रोग उपचार (Mental Illness Diagnosis)

निदान तय करने और संबंधित जटिलताओं की जांच करने के लिए आपके पास ये जांचें हो सकती हैं:

  • मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन: डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ आपसे आपके लक्षणों, विचारों, भावनाओं और व्यवहार के बारे में बात करेंगे। आपको एक प्रश्नावली भी भरनी पड़ सकती है।
  • शारीरिक जांच: आपका डॉक्टर यह सुनिश्चित करेगा कि आपके लक्षणों का कारण कोई शारीरिक समस्या तो नहीं है।
  • प्रयोगशाला परीक्षण: इसमें थायरॉयड की जांच या अल्कोहल और ड्रग्स की स्क्रीनिंग शामिल हो सकती है।

किस मानसिक बीमारी का निदान है यह जानना

कभी-कभी यह पता लगाना मुश्किल होता है कि आपके लक्षण किस मानसिक बीमारी से जुड़े हैं। लेकिन सही निदान के लिए समय और प्रयास करना जरूरी है, क्योंकि इससे उचित इलाज तय करने में मदद मिलती है।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ Diagnostic and Statistical Manual of Mental Disorders (DSM-5) का उपयोग करते हैं, जिसे अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन ने प्रकाशित किया है।

मानसिक बीमारियों के प्रमुख प्रकार

  • अवसाद (Depression): लगातार उदासी, रुचि की कमी और जीवन पर असर।
  • चिंता विकार (Anxiety disorders): भविष्य की चिंता, फोबिया, पैनिक डिसऑर्डर।
  • बाइपोलर डिसऑर्डर: अत्यधिक ऊर्जा (मेनिया) और अवसाद के बीच बदलाव।
  • ओसीडी और संबंधित विकार: बार-बार आने वाले विचार और दोहराए जाने वाले व्यवहार।
  • न्यूरोकॉग्निटिव विकार: जैसे अल्ज़ाइमर, डिमेंशिया, ब्रेन इंजरी।
  • न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर्स: जैसे ऑटिज़्म, एडीएचडी, लर्निंग डिसऑर्डर।
  • स्किज़ोफ्रेनिया और अन्य मनोविकृति विकार: भ्रम, मतिभ्रम और वास्तविकता से कट जाना।
  • ट्रॉमा और तनाव संबंधी विकार: PTSD, एक्यूट स्ट्रेस डिसऑर्डर।
  • डिसोसिएटिव विकार: पहचान या याददाश्त से जुड़ी समस्या।
  • सोमैटिक विकार: शारीरिक लक्षण जिनका चिकित्सा कारण नहीं मिलता।
  • खानपान विकार: एनोरेक्सिया, बिंज-ईटिंग डिसऑर्डर।
  • नींद से जुड़ी समस्याएं: अनिद्रा, स्लीप एपनिया।
  • व्यक्तित्व विकार: जैसे बॉर्डरलाइन, नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर।
  • नशा और लत से जुड़ी समस्याएं: शराब, तंबाकू, ड्रग्स या जुआ की लत।

इलाज (Treatment): दवाइयाँ

  • मूड स्टेबलाइजर्स: बाइपोलर डिसऑर्डर में।
  • एंटी-एंग्ज़ायटी दवाएँ: चिंता और अनिद्रा के लिए।
  • एंटीडिप्रेसेंट्स: अवसाद और चिंता के लिए।
  • एंटीसाइकोटिक दवाएँ: स्किज़ोफ्रेनिया और अन्य मनोविकृति विकारों में।

मस्तिष्क उत्तेजना उपचार (Brain-stimulation)

जब दवाएँ और थेरेपी काम न करें, तो ECT या TMS जैसी तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं।

अस्पताल और रिहैब कार्यक्रम

गंभीर मानसिक बीमारियों में मरीज को 24 घंटे की देखभाल या रिहैब सेंटर में भर्ती किया जा सकता है।

मानसिक रोग और नशा संयुक्त इलाज की आवश्यकता क्यों है?

यदि किसी व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य और नशा दोनों की समस्या है, तो केवल एक का इलाज करने से स्थिति में सुधार नहीं होता। मानसिक रोग को नज़रअंदाज करने से मरीज बार-बार नशे की ओर लौट सकता है। वहीं केवल मानसिक रोग का इलाज करने पर नशा उसकी प्रगति को रोक देता है।

संयुक्त इलाज इन दोनों समस्याओं को साथ में पहचानकर उनका समाधान करता है। इससे मरीज को लंबे समय तक स्थिरता, बेहतर जीवन गुणवत्ता और समाज में फिर से जुड़ने का मौका मिलता है।

मानसिक रोग उपचार के मुख्य घटक

मानसिक रोगों और व्यसन का संयुक्त इलाज कई हिस्सों पर आधारित होता है:

  • सही डायग्नोसिस (निदान): डॉक्टर यह समझते हैं कि मरीज को किस मानसिक रोग की समस्या है और किस प्रकार का नशा उसकी हालत बिगाड़ रहा है।
  • दवा और थैरेपी का संतुलन: मानसिक रोगों के लिए दी जाने वाली दवाओं और नशा छुड़ाने की दवाओं का सही संयोजन किया जाता है।
  • काउंसलिंग और मनोचिकित्सा: मरीज को अपनी भावनाओं और आदतों को समझने के लिए थेरेपी दी जाती है।
  • जीवनशैली में बदलाव: नियमित दिनचर्या, स्वस्थ भोजन, और ध्यान-योग जैसी गतिविधियाँ शामिल की जाती हैं।
  • परिवार का सहयोग: परिवार को भी उपचार प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाता है ताकि मरीज को भावनात्मक और सामाजिक सहारा मिल सके।

मानसिक रोग और नशा  सही इलाज केंद्र कैसे चुनें?

ड्यूल डायग्नोसिस का इलाज हर जगह उपलब्ध नहीं होता। सही इलाज केंद्र चुनते समय इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है:

  • विशेषज्ञ टीम: क्या वहाँ मानसिक रोग विशेषज्ञ (Psychiatrists) और नशा उपचार विशेषज्ञ दोनों उपलब्ध हैं?
  • अनुभव और सफलता दर: केंद्र ने पहले कितने मरीजों का सफल इलाज किया है।
  • इलाज की व्यक्तिगत योजना: हर मरीज की स्थिति अलग होती है। क्या केंद्र व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार योजना बनाता है?
  • सुविधाएँ और वातावरण: सुरक्षित, सकारात्मक और सहयोगी माहौल होना चाहिए।
  • फॉलो-अप और आफ्टरकेयर: इलाज खत्म होने के बाद भी क्या केंद्र मरीज को सहयोग और परामर्श देता है?

The Jagruti Rehab Approach

Jagruti Rehab में मानसिक रोग उपचार और नशा मुक्ति का इलाज साथ-साथ किया जाता है। यहाँ की विशेषज्ञ टीम में अनुभवी मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, और व्यसन विशेषज्ञ शामिल हैं।

  • यहाँ मरीज को उसकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार इलाज दिया जाता है।
  • दवा और थैरेपी का संतुलित उपयोग करके, मानसिक रोग और नशे दोनों को नियंत्रित किया जाता है।
  • परिवार को भी काउंसलिंग और थेरेपी का हिस्सा बनाया जाता है।
  • डिस्चार्ज के बाद भी फॉलो-अप और आफ्टरकेयर पर ध्यान दिया जाता है, जिससे मरीज दोबारा समस्या में न फँसे।

एक नई शुरुआत की ओर

मानसिक स्वास्थ्य और नशा की समस्या जटिल होती है, लेकिन सही इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। केवल एक पहलू पर ध्यान देने से समस्या अधूरी रह जाती है। इसलिए ड्यूल डायग्नोसिस हिंदी पद्धति यानी संयुक्त इलाज सबसे प्रभावी तरीका है।

Jagruti Rehab इस क्षेत्र में वर्षों का अनुभव रखता है और मरीजों को एक सुरक्षित, सहयोगी और विशेषज्ञ वातावरण देता है। यदि आप या आपका कोई प्रियजन मानसिक रोग और नशे की दोहरी समस्या से जूझ रहा है, तो Jagruti Rehab सही जगह है जहाँ से आप एक नई शुरुआत कर सकते हैं।

Frequently asked questions

ड्यूल डायग्नोसिस तब होता है जब किसी व्यक्ति को मानसिक रोग और नशे दोनों की समस्या होती है। इस स्थिति में केवल एक का इलाज पर्याप्त नहीं होता। दोनों का एक साथ इलाज जरूरी है ताकि मरीज पूरी तरह से ठीक हो सके।

संयुक्त इलाज में दवा, थैरेपी, और काउंसलिंग को साथ मिलाकर उपयोग किया जाता है। यह मानसिक रोगों को नियंत्रित करता है और साथ ही नशा छुड़ाने में मदद करता है। इस तरह मरीज धीरे-धीरे स्थिर और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

नहीं, हर जगह यह सुविधा नहीं होती। इसके लिए विशेष अनुभव और विशेषज्ञ टीम की जरूरत होती है। इसलिए सही इलाज केंद्र चुनते समय यह देखना जरूरी है कि वहाँ मानसिक रोग और नशे दोनों का इलाज एक साथ उपलब्ध हो।

Jagruti Rehab में व्यक्तिगत इलाज योजनाएँ बनाई जाती हैं। यहाँ अनुभवी डॉक्टर, काउंसलिंग, और परिवार की भागीदारी पर ध्यान दिया जाता है। साथ ही, डिस्चार्ज के बाद भी मरीज को फॉलो-अप और आफ्टरकेयर दिया जाता है ताकि सुधार लंबे समय तक बना रहे।

Share

Dr. Amar Shinde, Psychiatrist at Jagruti Rehab Centre
Dr. Amar Shinde

Dr. Amar Shinde, founder of Jagruti Rehab, is a renowned psychiatrist in India with over two decades of experience in mental health, addiction recovery, and neuropsychiatry, dedicated to holistic, compassionate patient care.

Book a Confidential Consultation with Our Experts

Our team of medical professionals is there to hear and guide you towards the right treatment plan. Get the right professional advice, instant support and confidential consultations with recovery plans especially tailored to your needs.

Phone